स्तंभ

  • रोहिंग्या मुसलमानों की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार कौन?

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार के दौरे पर दोनों देशों के बीच रिश्तों को और मजबूत करने पर बल दिया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने रोहिंग्या मुस्लिमों का भी मुद्दा उठाया है। हालांकि मोदी ने सीधे तौर पर जिक्र तो नहीं किया लेकिन इशारों में म्यांमार को यह संदेश जरूर दिया है कि भारत उनकी इस समस्या के समाधान में हर संभव मदद को तैयार है। गौरतलब है कि भारत में करीब 40 हजार रोहिंग्या शरणार्थी हैं। भारत ने इन्हें वापस भेजने का फैसला किया है। हाल ही में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र के डाक्यूमेंट होने के बावजूद रोहिंग्या शरणार्थियों को भारत में नहीं रहने दिया जा सकता। इन शरणार्थियों के आतंकी कनेक्शन की आशंका जताई जा रही है। कहा जा रहा है कि ये शरणार्थी न केवल भारतीय नागरिकों के अधिकार पर अतिक्रमण कर रहे हैं बल्कि सुरक्षा के लिए भी चुनौती हैं। म्यांमार मे

  • जीवन के हर क्षेत्र में सफलता हासिल करने के पांच मंत्र

    अगर आपको अक्सर ऐसा लगता है कि सफलता आपके हाथ नहीं आ रही, तो शायद अब आपको अपनी कोशिशों में कुछ बदलाव लाने की जरूरत है। पांच ऐसे सुझाव हैं, जिन्हें अपनाकर आप जीवन के हर क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकते हैं।1. किस्मत की बात भूल जाएं, करें इरादा पक्काजीवन में कुछ बातें या घटनाएं संयोगवश हो सकती हैं। लेकिन आप अगर इस इंतजार में रहेंगे कि सब कुछ अपने आप अकस्मात ही आपको हासिल होगा, तो शायद आप सारी जिंदगी इंतजार ही करते रह जाएंगे, क्योंकि संयोग हमेशा तो नहीं हो सकता। यहां तक कि भौतिक विज्ञान की क्वांटम थ्योरी भी यही कहती कि अगर आप असंख्य बार तक कोशिश करते रहेंगे, तो एक दिन टहलते हुए दीवार के बीच से भी निकल सकते हैं। आपके बार बार करने से कणों में स्पंदन होता रहेगा, जिसकी वजह से शायद दीवार के बीच से निकल पाना भी संभव हो जाए। लेकिन जब तक आप इस अवस्था को हासिल करेंगे, आपकी खोपड़ी फट चुक

  • नोटबंदी मोदी के ‘साहस’ को दिखाती है: फ्रांस

    फ्रांस ने भारत में नोटबंदी की सराहना करते हुए कहा है कि यह एक साहसिक निर्णय है जो यह बताता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर चोरी, भ्रष्टाचार तथा कालाधन के खिलाफ कितने प्रतिबद्ध हैं।फ्रांस के विदेश तथा अंतरराष्ट्रीय विकास मंत्री जिएन-मर्क अयराल्ट ने मोदी के विदेशी निवेश आकषिर्त करने के लिये ‘उल्लेखनीय सुधार’ की भी सराहना की। उन्होंने कहा, ‘‘वे सही दिशा में हैं।’’ ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की सराहना करते हुए उन्होंने पीटीआई भाषा से विशेष बातचीत में कहा कि फ्रांस अपने अनुभव, विशेषज्ञता तथा प्रौद्योगिकी के साथ बड़े सहयोगी की इच्छा करता है।’’ उन्होंने यह भी कहा कि भारत और यूरोपीय संघ को व्यापार बाधा खत्म करने के लिये ‘संयुक्त प्रयास’ करने चाहिए। साथ ही उन्होंने आयात-निर्यात व्यवस्था को आसान बनाने तथा नियमन के भरोसेमंद होने तथा स्थिरता में सुधार के संदर्भ में सुधारों की वकालत की।चा

  • प्रधानमंत्री की गरिमा के अनुरूप नहीं

    यों तो प्रधानमंत्री की तस्वीर तमाम सरकारी विज्ञापनों में रहती है, बहुत-सी स्वायत्त मानी जाने वाली संस्थाओं के परिसरों में भी। लेकिन केवीआईसी यानी खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग की डायरी और कैलेंडर में छपा उनका फोटो विवाद का विषय बन गया, तो यह स्वाभाविक ही है। जहां नरेंद्र मोदी का फोटो छपा है वहां पहले महात्मा गांधी का फोटो रहता था। अधनंगे बदन, सिर्फ घुटने तक धोती पहने, दुबले-पतले, चरखे पर सूत कातते गांधी की यह छवि आजादी, स्वराज और स्वावलंबन का संदेश भी रही है और खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग का टे्रडमार्क भी। यह हैरत की बात है कि आयोग ने अपनी तरफ से 2017 की जो डायरी और कैलेंडर निकाले हैं उनमें गांधी की यह तस्वीर नहीं है। उनकी जगह मोदी मौजूद हैं। सजे-संवरे, चरखे पर हाथ रखे हुए। अगर गांधी का चित्र हटाया न गया होता, तो शायद मोदी की चित्रात्मक उपस्थिति इतने विवाद का विषय न बनती। गांधी क

  • भाजपा-बसपा के माथे पर चिंता

    आखिरकार पार्टी पर हक को लेकर सपा में चल रहे कानूनी झगड़े का पटाक्षेप हो गया। निर्वाचन आयोग ने अखिलेश यादव के पक्ष में फैसला सुनाया। यानी अब पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अखिलेश यादव और उनकी अगुआई वाले धड़े का अधिकार होगा। आयोग का यह फैसला बिल्कुल वाजिब है। आयोग ने इस मामले में पार्टी-विभाजन के पूर्व के उदाहरणों को भी सामने रखा और दोनों तरफ के तथ्यों को भी। हर लिहाज से यह जाहिर था कि अखिलेश की दावेदारी एकदम पुख्ता है। संगठन और विधायक दल, दोनों में अखिलेश को हासिल समर्थन के आगे मुलायम सिंह कहीं नहीं टिक सके। इस झगड़े और इसकी परिणति से जाहिर है कि सामने दीवार पर जो लिखा था, मुलायम सिंह उसे नहीं पढ़ पा रहे थे। उनकी जिद और उनका अहं उन्हें ले डूबा। जो पार्टी उन्होंने बनाई और खड़ी की थी, उसमें वे अलग-थलग पड़ गए, क्योंकि वे यह मोटी-सी बात स्वीकार नहीं कर पाए कि सपा उत्तर-प्रदेश केंद्रित है, और

  • कश्मीरी अलगाववादियों से बात करने में कोई बुराई नहीं

    कश्मीर पर हमारी संसद में जो बहस हुई, वह इस बात का सबूत है कि हमारा लोकतंत्र जीवंत है, मुखर है और अपने हर नागरिक के दुख-दर्द को अपना दुख-दर्द समझता है। कितनी अच्छी बात है कि संसद के सभी दलों ने कश्मीर की जनता के घावों पर मरहम लगाने की मांग की है। जिस सरकार को सांप्रदायिक और तंगदिल कहकर बदनाम किया जाता रहा है, उसी के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि सरकार कश्मीर के विभिन्न दलों और संगठनों से बात करेगी।   जाहिर है कि वह आतंकवादियों से या उनके समर्थकों से बात नहीं करेगी। यह स्वाभाविक है। सरकार की सत्ता को चुनौती देने वालों से सामान्यतया सरकारें बात नहीं करतीं। वे उन्हें बात से नहीं, लात से ठीक करने का रास्ता अपनाती हैं। याने जैसे को तैसा। इसे गलत भी नहीं कह सकते लेकिन मैं सोचता हूं कि लातवालों से भी बात करने में कोई बुराई नहीं ह