आधार डाटा लीक मामलाः SC से सरकार तक की हर अहम सूचना जिसे जानना आपके लिए जरूरी है

आधार डाटा लीक मामलाः SC से सरकार तक की हर अहम सूचना जिसे जानना आपके लिए जरूरी है

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पत्रकारों को अभिव्यक्ति की आजादी होनी चाहिए, कुछ गलत रिपोर्टिंग हो सकती है, लेकिन इस वजह से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता है. कोर्ट ने यह बात मानहानि के एक मुकदमे की सुनवाई करते हुए कही. मामला पटना में अवैध जमीन आवंटन का था, याचिका एक सांसद ने दायर की थी. आधार डेटा में कथित सेंध की खबर को लेकर प्राथमिकी दर्ज किए जाने की आलोचना के बीच सरकार ने कहा है कि वह प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर प्रतिबद्ध है. वहीं, भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने आश्चर्य जताते हुए कहा है कि क्या लोग बनाना रिपब्लिक में रह रहे हैं. आधार डेटा में कथित सेंध की खबर पर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) की याचिका पर दिल्ली पुलिस ने एक ओपन एंडेड प्राथमिकी दर्ज की है. शिकायत में आधार डेटा में कथित सेंध की खबर देने वाली ‘द ट्रिब्यून’ की रिपोर्टर समेत चार लोगों के नाम हैं, लेकिन विधि एवं आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्राथमिकी अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की गयी है. द ट्रिब्यून’ की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि कैसे पैसों के बदले आधार कार्ड की जानकारी आसानी से खरीदी जा सकती है. महज 500 रुपये देकर आधार डाटा बेस में प्रवेश किया जा सकता है. रिपोर्टर ने आधार का डाटा लीक भी किया था. इस बीच, भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि आधार ब्यौरे के दुरुपयोग को रेखांकित करने वाली खबर देने वाली पत्रकार को कथित सच्चाई सामने लाने के लिए परेशान किया जा रहा है और पूछा कि क्या देश के लोग किसी बनाना रिपब्लिक में रह रहे हैं. कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आधार संबंधित सूचनाओं में कथित रूप से सेंध लगाने के मामले को उजागर करने वाले समाचार पत्र एवं पत्रकार के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई के जरिये असहमति के स्वरों को दबाने तथा शुतुरमुर्ग जैसा रवैया अपनाने का आरोप लगाया. माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने भी आधार संबंधी आंकडों के लीक होने से जुडी मीडिया रिपोर्ट पर प्राथमिकी दर्ज करने के मामले को प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया है. एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी प्राथमिकी वापस किये जाने को लेकर सरकार से दखल की मांग की और कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए. एक वक्तव्य में कॉन्फेडरेशन ऑफ न्यूजपेपर एंड न्यूज एजेंसी इंप्लाइज आर्गनाइजेशन ने कहा कि यह कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है और जो लोग सत्ता में हैं उन्हें पसंद नहीं आने वाली खबर रिपोर्ट करने से प्रेस को वंचित करने सरीखा है. 

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