इन बातों का रखेंगे ध्यान तो कभी नहीं होगा अल्सर

इन बातों का रखेंगे ध्यान तो कभी नहीं होगा अल्सर

पाचन तंत्र से संबंधित अंगों में घाव होने को मेडिकल लैंग्वेज में अल्सर कहते हैं। इसके होने की कई वजहें हो सकती हैं, लेकिन इनमें सबसे प्रमुख वजह, अनुचित जीवनशैली का होना है। ध्यान न देने पर कई बार कंडीशन बिगड़ भी सकती है। ऐसे में इससे बचने के लिए जरूरी है कि हम अपनी जीवनशैली और खान-पान का पूरा ध्यान रखें।
क्या होता है अल्सर
हमारे पेट के पाचन संबंधी आंतरिक अंगों में म्यूकस की एक चिकनी परत होती है, जो उन अंगों की अंदरूनी परत को शक्तिशाली एसिड्स और एंजाइम्स जैसे पेप्सिन और हाइड्रोक्लोरिक एसिड के दुष्प्रभाव से बचाती है। यह एसिड शरीर के ऊतकों के लिए अत्यधिक हानिकारक होता है लेकिन पाचन के लिए जरूरी भी होते हैं। एसिड और म्यूकस के मध्य एक बेहतरीन समन्वय होता है, जब यह संतुलन बिगड़ जाता है, तब अल्सर विकसित हो सकता है। आमतौर पर यह अल्सर इसोफेगस, स्टमक और छोटी आंत की ऊपरी झिल्ली में पनपता है।
पेप्टिक अल्सर
पेप्टिक अल्सर पाचन तंत्र से संबंधित अंगों के मार्ग में विकसित होने वाले छाले या घाव होते हैं। अपने विकसित होने के स्थान के आधार पर यह तीन प्रकार के होते हैं। पहला गैस्ट्रिक अल्सर, जो स्टमक के अंदर विकसित होता है। दूसरा इसोफेगियल अल्सर, यह उस खोखली नली (इसोफेगस) में होता है, जो गले से भोजन को पेट में ले जाती है। इसोफेगस का अल्सर तुलनात्मक रूप से कम होता है। तीसरा ड्योडेनल अल्सर, जो छोटी आंत के ऊपरी भाग जिसे ड्युडेनम कहते हैं, में होता है। ड्युडेनम अल्सर स्टमक यानी गैस्ट्रिक अल्सर से अधिक सामान्य बीमारी है।
अल्सर के प्रमुख लक्षण
पेट में दर्द होना, बता दें कि यह दर्द तब और तेज हो जाता है जब पेट खाली होता है या स्टमक एसिड अल्सरग्रस्त क्षेत्र के संपर्क में आता है।
रात में ऐसा लगता है जैसे पेट में आग जल रही हो।
खून की उल्टी होना।
स्टूल का कलर डार्क हो जाना।
जी मचलना या उल्टी होना।
भार में तेजी से कमी आना। 
भूख में परिवर्तन आना।
रिस्क फैक्टर्स
हेलिकोबैक्टैर पायरोली बैक्टीरिया का संक्रमण। 
तनाव।
अनुवांशिक कारण।
अत्यधिक मात्रा में स्टमक एसिड का स्रावण।
तैलीय और मसालेदार भोजन का अधिक मात्रा में सेवन।
अधिक मात्रा में शराब, कैफीन और तंबाकू का सेवन। 
ऑस्टियोपोरोसिस के उपचार के लिए ली जाने वाली दवाइयां। 
ज्यादा मात्रा में पेन किलर, एस्पिरिन और एंटीएसिडिक दवाओ का सेवन करना। 
डायबिटीज।
इनका करें सेवन
खान-पान पर नियंत्रण रखकर ना केवल पेप्टिक अल्सर के लक्षणों को कम किया जा सकता है बल्कि इसका शिकार होने से भी बचा जा सकता है।  
केले में एंटी-बैक्टीरियल तत्व पाए जाते हैं, जो पेट के अल्सर के विकास को धीमा करता है। अत: प्रतिदिन नाश्ते के बाद केला खाएं। 
पत्ता गोभी में एस्मेथाइलमेथियोनिन होता है। इसे अक्सर ‘विटामिन यू’ भी कहा जाता है। यह न केवल अल्सर को रोकता है बल्कि घावों को भी तेजी से भरता है। 
नाश्ते के पहले एक चम्मर शहद का सेवन जरूर करें। शहद बैक्टीरिया से लड़ता है, डिहाइड्रेशन से बचाता है और नमी बनाए रखता है। यह ऊतकों को क्षतिग्रस्त होने से बचाता है और नए ऊतकों के विकास की प्रक्रिया को तेज करता है।  
फूल गोभी में सल्फोेराफैन होता है। यह पाचन मार्ग के बैक्टीरिया को नष्ट कर देता है। 
रोज अपने खाने के साथ एक-दो कलियां लहसुन की खाएं; इसमें एंटी-अल्सर के गुण होते हैं।
दही में गुड बैक्टीरिया होते हैं, जो एच.पायलोरी के विकास को रोकते हैं और अल्सर के घावों को भरने में सहायता करते ह
इनसे करें परहेज
अल्सर से बचने के लिए कुछ खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए।
कैफीन और कार्बोनेटेड पेय पदार्थ: चाय, कॉफी और सोडा का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह एसिड के उत्पादन को स्टीम्युलेट करते हैं, जिससे अल्सर के लक्षण और गंभीर हो जाते हैं। 
तैलीय और मसालेदार भोजन: अधिक तेल और मसालेदार भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इनके कारण एसिड का उत्पादन ट्रिगर होता है और स्टमक अल्सर से जुड़े हुए लक्षण और अधिक खराब हो जाते हैं। 
अम्लीय भोजन: ऐसे खाद्य पदार्थ, जिनमें साइट्रिक एसिड की मात्रा अधिक होती है उनके सेवन से स्टमक अल्सर से पीड़ित लोगों को समस्या बढ़ती है। साइट्रिक एसिड नीबू, मौसंबी, संतरा, अंगूर, पाइन एप्पल, फलों के जूस, जैम और जेली में होता है। 
अन्य खाद्य पदार्थ: लाल मांस, मैदे से बनी चीजों, व्हाइट ब्रेड, चीनी, पास्ता और प्रोसेस्ड भोजन का सेवन कम करना चाहिए।
युवा हो रहे हैं ज्यादा शिकार
जीवनशैली और खान-पान में लापरवाही का ही नतीजा है कि किशोर और युवा भी बड़ी संख्या में अल्सर के शिकार हो रहे हैं। इसका प्रमुख कारण सोने का नियत समय न होना, कार्यस्थल पर बेहतर प्रदर्शन का तनाव, जंक फूड का बढ़ता सेवन, डाइटिंग जिसके कारण शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। इसके अलावा युवाओं में धूम्रपान, शराब और तंबाकू का सेवन भी बढ़ा है, जो विभिन्न प्रकार के अल्सर को ट्रिगर करता है।

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