कल खास पहर में करें पूजन, लड़ाई-झगड़े होंगे समाप्त

कल खास पहर में करें पूजन, लड़ाई-झगड़े होंगे समाप्त

कल पौष मास के मंगलवार दि॰ 26.11.17 को दुर्गाष्टमी पर्व मनाया जाएगा। शास्त्रनुसार प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी पर दुर्गाष्टमी मनाई जाती है। देवी को वार अनुसार भोग लगाया जाता है। मंगलवार होने के कारण महादेवी के चामुण्डा स्वरूप का पूजन किया जाएगा। देवी चामुण्डा जगदंबा का ही एक रूप है। दूर्गा सप्तशती के अनुसार कालांतर में शुम्भ व निशुम्भ नामक दो दैत्यो द्वारा पृथ्वी व स्वर्ग पर अत्याचार किया गया। जिसके फलस्वरूप देवों की पुकार पर जगदंबा ने अत्यंत सुंदर कोशिकी के रूप में अवतार लिया। देवी के रूप पर मोहित हुए शुम्भ-निशुम्भ ने कोशिकी को विवाह प्रस्ताव भेजा। जिस पर देवी ने उन्हें युद्ध मे हारने वाले से विवाह करने की इच्छा जताई। कोशिकी के दुसाहस पर क्रोधित शुम्भ-निशुम्भ ने देवी से लड़ने हेतु अपने दो असुरो चण्ड-मुण्ड को भेजा। देवी कोशिकी ने अपना अत्यंत भयंकर रक्तवर्ण रूप धारण कर चण्ड-मुण्ड का वध किया। इसी कारण इनका नाम चामुण्डा पड़ा। भौम दुर्गाष्टमी के विशेष पूजन, व्रत व उपाय से रक्त विकारों से मुक्ति मिलती है, भौतिक सुखों में वृद्धि होती है, लड़ाई-झगड़े समाप्त होते हैं।
पूजन विधि: देवी चामुण्डा का दशोंपचार पूजन करें। तांबे के दीये में तेल का दीप करें, गुगगल से धूप करें, लाल गुडहल का फूल, सिंदूर व गेहूं चढ़ाएं, गुड़ का भोग लगाएं। तथा लाल चंदन की माला से 108 बार इस विशिष्ट मंत्र को जपें। पूजन के बाद भोग किसी स्त्री को भेंट करें।
पूजन मुहूर्त: प्रातः 09:35 से प्रातः 10:35 तक। 
पूजन मंत्र: ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
उपाय
रक्त विकारों से मुक्ति हेतु तेल में सिंदूर मिलाकर देवी चामुण्डा पर चढ़ाएं।
भौतिक सुखों में वृद्धि हेतु देवी चामुण्डा पर चढ़े मसूर घर की दक्षिण दिशा में रखें। 
लड़ाई-झगड़े समाप्त करने हेतु देवी चामुण्डा पर चढ़ें गेहूं के दाने कर्पूर से जला दें।
 

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