न्याय की आस मे हर उस दहलीज पर दस्तक दे रही पीड़िताएं जहाँ से न्याय की जरा भी उम्मीद फिर भी नहीं मिल पा रहा न्याय

न्याय की आस मे हर उस दहलीज पर दस्तक दे रही पीड़िताएं जहाँ से न्याय की जरा भी उम्मीद फिर भी नहीं मिल पा रहा न्याय

अम्बेडकरनगर- जिले में केंद्र व प्रदेश सरकार के तमाम दिशा निर्देशों के बावजूद महिलाओं बालिकाओं पर होने वाले अत्याचार उत्पीड़न की वारदातें थमने का नाम ही नहीं ले रही है। जिसकी वजह जिन पर इन घटनाओं को रोकने की जिम्मेदारी है वही आरोपियों के लिए सुरक्षा कवच बने जा रहे हैं। जिले में जहांगीरगंज, हंसवर, राजेसुल्तानपुर, बसखारी, मालीपुर, भीटी, अलीगंज सहित कईं अन्य थाना क्षेत्रों में महिलाओं बालिकाओं पर बीते 2 माह के अंदर होने वाले अत्याचार एवं उत्पीड़न की घटनाएं इस बात की चीख चीखकर गवाही दे रही है। पुलिस अपराध तथा अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण कर पाने में सफल नहीं हो पा रही है। बेलगाम मनवढ़ आरोपी आए दिन उत्पीड़न की वारदातें अंजाम दे रहे हैं और पुलिस आरोपियों के लिए ही सुरक्षा कवच बनी हुई है। जहाँगीरगँज थाना क्षेत्र के सुतहरपारा गांव में बीती शुक्रवार की रात्रि छेड़खानी का विरोध करने पर दबंगों ने मां बेटी की निर्ममता पूर्वक पिटाई कर दी। पुलिस ने पीड़िता के पिता के तहरीर पर गांव निवासी महेंद्र यादव पुत्र फौलादी यादव, सूरज श्रीवास्तव पुत्र सुनील श्रीवास्तव के विरुद्ध काफी जद्दोजहद के बाद मारपीट गाली गलौज जान से मार डालने की धमकी देने व पाक्सो एक्ट की धाराओं के तहत मामला पंजीकृत किया। लेकिन छः दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस मामले में प्रभावी कार्रवाई तो दूर आरोपियों के लिए सुरक्षा कवच बनी हुई है। नामजद आरोपी स्वच्छंद विचरण कर कानून व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। मामले के विवेचक उपनिरीक्षक सदानंद सिंह द्वारा न सिर्फ पीड़िता एवं उसके परिजनों पर सुलह के लिए दबाव डाला जा रहा है बल्कि मुकदमे से धाराएं विवेचना के दौरान खत्म करने की भी धमकी दी जा रही है। आरोपियों व पुलिस द्वारा पीड़ित पक्ष पर सुलह के लिए इस कदर दबाव डालना शुरू किया गया की पीड़िता के पिता को विवश होकर अन्यत्र कहीं चला जाना पड़ा। यही हाल हंसवर थाना क्षेत्र के झझवां गांव निवासी खुशबू मोहम्मदी पत्नी रईस अहमद के प्रकरण का भी है। ससुरालीजनों ने दहेज के लिए प्रताड़ना की सारी हदें पार करते हुए पहले खुशबू मोहम्मदी को मारपीट कर घर से बेदखल कर दिया वह मामले की प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए दर्जनों बार हंसवर थाने का चक्कर लगाती रही। बीते 12 दिसंबर को खुशबू मोहम्मदी ने पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर उन्हें शिकायती पत्र देकर न्याय की गुहार लगाया लेकिन अभी तक उसे न्याय नहीं मिल पाया। बीते 17 दिसंबर को जब खुशबू मोहम्मदी अपने बेटा इसरार अहमद उर्फ कल्लू मिस्त्री के साथ थाने पहुंची तो थानाध्यक्ष विजय सिंह उसे देखते ही आग बबूला हो गए थानाध्यक्ष ने पीड़िता एवं उसके पिता को अपमानित करते हुए थाने से ही धमकी देकर डांट कर भगा दिया। पीड़िता खुशबू मोहम्मदी ने 18 दिसंबर को महामहिम राज्यपाल मुख्यमंत्री पुलिस उपमहानिरीक्षक जिलाधिकारी एवम पुलिस अधीक्षक को जरिए ऑनलाइन ऑफलाइन शिकायती पत्र प्रेषित कर कार्रवाई की मांग किया। लेकिन बावजूद उसके कार्यवाही के नाम पर नतीजा सिफर रहा। फिर पुनः बुधवार को मनबढ़ आरोपी पति रईस अहमद ने खुशबू मोहम्मदी को कॉल कर उसे फोन पर ही तलाक देते हुए सारे रिश्ते नाते खत्म करने की धमकी दी। फोन पर दिए गए तलाक से आहत खुशबू मोहम्मदी ने मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से लेकर इलाकाई पुलिस तक से की लेकिन उसकी फरियाद अनसुनी रही। बीते रविवार को मनबढ़ आरोपी रईस अहमद अपने साथियों के साथ खुशबू मोहम्मदी के मायके बसखारीे जा पहुंचा तथा खुशबू मोहम्मदी एवं उसके पिता पर शिकायत वापस लेने का न सिर्फ दबाव डालने लगा बल्कि शिकायत वापस न लेने पर उसे व उसके माता-पिता व मासूम बच्चे को मार डालने की धमकी दिया। बावजूद उसके पुलिस ने अभी तक कोई कार्यवाही नहीं किया। ऐसे में सहज अनुमान लगाया जा सकता है जिले में आधी आबादी किस कदर सुरक्षित है। यह दो घटनाएं तो महज बानगी भर मात्र है ऐसी दर्जनों घटनाएं बीते दो माह के अंदर हुई है। जिसमें पुलिस पीड़ितों को न्याय दिलाने के बजाए आरोपियों के ही सुरक्षा कवच के रुप में खड़ी नजर आ रही है।

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