बनाएं इस फील्ड में करियर, नहीं रहेंगे बेरोजगार

बनाएं इस फील्ड में करियर, नहीं रहेंगे बेरोजगार

नर्सिंग दुनिया का सबसे ज्यादा सेवामयी पेशा है। मेडिकल का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है, जहां नर्सो की जरूरत न होती हो। यदि आपमें भी सेवा करने का जज्बा है तो इस क्षेत्र में करियर बना सकते हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में महज डॉक्टर शामिल नहीं होते, बल्कि इनके सहायक के तौर पर कई दूसरे लोग भी कार्य करते हैं। इन्हें भले ही डॉक्टरों के सामने नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन वे डॉक्टरों से कम सेवाभाव के साथ काम नहीं कर रहे होते। इस प्रकार के काम करने वालों के प्रोफेशन को पैरामेडिकल का नाम दिया जाता है।
एएनएम या हेल्थ वर्कर
इसके लिए योग्यता के रूप में अभ्यर्थी का 10वीं पास होना जरूरी है। इस कोर्स की अवधि 18 माह की होती है। जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी (जीएनएम)- इस कोर्स के लिए अभ्यर्थी को 12वीं कक्षा में भौतिक, रसायन और जीव विज्ञान विषय के साथ 40 प्रतिशत अंकों के साथ पास होना चाहिए। इस कोर्स की अवधि साढ़े तीन साल की होती है।
बीएससी इन नर्सिंग (बेसिक)
इसके लिए 12वीं में भौतिक, रसायन और जीव विज्ञान के साथ 45 प्रतिशत अंकों के साथ पास होना चाहिए। इस कोर्स की अवधि चार साल की होती है। अब इस प्रोफेशन में आर्ट विषय वालों को भी एडमिशन मिल जाता है।
बीएससी इन नर्सिंग (पोस्ट बेसिक)
इस दो वर्ष की अवधि के कोर्स के लिए 12वीं के साथ-साथ जीएनएम की डिग्री भी होनी चाहिए। यदि 12वीं और जीएनएम के साथ कम से कम 2 साल का अनुभव भी हो तो इसे दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से तीन बरसों में भी पूरा किया जा सकता है।
एमएससी इन नर्सिंग
नर्सिंग में एमएससी करने के लिए नर्सिंग में 55 प्रतिशत अंकों के साथ बीएससी की डिग्री के साथ-साथ एक साल का अनुभव भी आवश्यक है। इस कोर्स की अवधि दो साल होती है।
दुनिया भर में है मांग
पूरे विश्व में भारत के केरल क्षेत्र की नर्से सबसे अधिक कार्यरत हैं। इससे पता चलता है कि विश्व में भारतीय नर्सों की बहुत अधिक मांग है। नर्सिंग क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए आज यूरोपीय देशों और खाड़ी देशों के साथ-साथ आॅस्ट्रेलिया आदि में नौकरी की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। विदेशों में इस नौकरी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ब्रिटेन नेशनल हेल्थ सर्विस ही हर साल एक हजार से अधिक भारतीय नर्सों की भर्ती करती है। विदेशों में काम करने के लिए कमीशन आॅफ ग्रेजुएट आॅफ फॉरेन नर्सिंग स्कूल (सीजीएफएनएस) और टेस्ट आॅफ इंग्लिश एज ए फॉरेन लेंग्वेज (टफेल) आदि की परीक्षाओं को उत्तीर्ण करना पड़ सकता है। यदि आपका अमेरिका में नौकरी करने का मन है तो सीजीएफएनएस परीक्षा को पास करना जरूरी है।
वेतन व सुविधा
निजी नर्सिंग होम्स में काम करने वाली नर्सों को शुरुआती दौर में 10,000 से 15,000 रुपए तक मिलते हैं, वहीं सरकारी अस्पतालों में काम करने वाली नर्सों को   35,000 रुपए तक मासिक वेतन मिलता है। इसके अलावा कुछ अस्पताल फ्री-मेडिकल ट्रीटमेंट और रहने-खाने की सुविधा आदि भी प्रदान करते हैं। यदि आप विदेश में काम करने के इच्छुक हैं तो आप शुरुआती दौर में भारतीय मुद्रा के अनुसार 75,000 से 1,25,000 रुपये तक कमा सकते हैं। वैसे इस क्षेत्र में अनुभव प्राप्त करने के बाद आप और भी अधिक वेतन पा सकते हैं।
कोर्स  
नर्सिंग क्षेत्र में डिप्लोमा, अंडर ग्रेजुएट एवं सर्टिफिकेट आदि कई तरह के कोर्स होते हैं, नर्सिंग में बीएससी करने के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन का कोर्स भी किया जा सकता है। इसके तहत डाइटेटिक्स, कार्डियोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिक्स, ऑपथैल्मोलॉजी, आॅथरेपेडिक्स आदि विभिन्न क्षेत्रों में से किसी में भी विशेषज्ञता हासिल की जा सकती है। पोस्ट ग्रेजुएट होने के बाद इस क्षेत्र में एमफिल और पीएचडी करने की भी सुविधा रहती है। अधिकांश अच्छे संस्थानों में दाखिला प्रवेश परीक्षा के आधार पर लिया जाता है।
 

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