वसंत पंचमी: जानिए वसंत पंचमी का महत्व

वसंत पंचमी: जानिए वसंत पंचमी का महत्व

वसंत पंचमी विद्या और बुद्धि की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। शास्त्रों के अनुसार माघ मास की पंचमी तिथि को ही वसंत पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है। वसंत पंचमी को श्री पंचमी और ज्ञान पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। इस साल वसंत पंचमी माघ शुक्ल पंचमी यानि 22 जनवरी (मंगलवार) को मनाई जाएगी। वसंत पंचमी के दिन भारतीय समुदाय के लोग जहां कहीं भी रहते हैं, इस त्यौहार को पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मानते हैं।
ये है महत्व 
पुराणों के अनुसार वसंत पंचमी के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने सरस्वती से खुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि इसी दिन तुम्हारी आराधना होगी। साथ ही सरस्वती को यह भी वरदान मिला था कि विद्या की देवी के रूप में इनकी पूजा संपूर्ण स्थानों पर होगी।
शास्त्रों के अनुसार वसंत पंचमी का संबंध त्रेता युग से है। एक कथा के अनुसार जब रावण ने माता सीता को हरण कर लंका की अशोक वाटिका में ले गया था। जिसके बाद श्री राम माता सीता की खोज में दक्षिण की ओर बढे। इस दौरान श्री राम सबसे पहले जिस स्थान पर रुके वह स्थान दंडकारण्य था। इस स्थान पर शबरी नाम की एक भीलनी रहती थी।
भीलनी से मिलन 
श्री राम राम जब उस भीलनी की कुटिया में गए, तो वह अपना सुध-बुध खोए बैठी थी। दरअसल शबरी श्री राम की अनन्य भक्त थीं। वह बेर को चख-चख कर श्री राम को खिलाने लगी। शबरी की ऐसी भक्ति की घटना को राम कथा वाचकों ने अपने-अपने ढंग से प्रस्तुत किया है। ऐसा माना जाता है कि जिस दिन श्री राम सीता माता की खोज करते-करते भीलनी के पास गए थे वह दिन वसंत पंचमी का ही दिन था। इसलिए इस दिन का महत्त्व इस मायने भी बढ़ जाता है।
 

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