उच्च न्यायालय का धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर उतरवाने के फैसले का स्वागत

उच्च न्यायालय का धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर उतरवाने के फैसले का स्वागत

लखनऊ। राष्ट्रीय सामाजिक कार्यकर्ता संगठन के संयोजक मुहम्मद आफ़ाक़ ने अपने एक बयान में कहा कि योगी सरकार यदि धार्मिक जगहों से मन्दिर, मस्जिद, गुरूद्वारे, गिरजाघरों के अलावा नौरात्र, गणपति, होली व दीवाली, ईद व बक़रईद, जुलूसे मुहम्मदी सल0 व मदहे सहाबा, मोहर्रम व चेहलुम जैसे प्रोग्रामों पर भी लाएन्ड आर्डर दुरूस्त करदे तो प्रदेश की जनता उनकी बहुत आभारी होगी। मुहम्मद ने आगे यह कहा कि हमारा इस्लाम लाउड स्पीकर उतरवा कर कमज़ोर नहीं किया जा सकता। हमसे कई हज़ार साल पुराना हिन्दु धर्म आज तक घण्टे और जागरण, गणपति, दुर्गा पूजा, राम नवमी, शिव जी के बारे में जाग जागकर अपने ही लोगों को बता रहे हैं कि तुम्हारा धर्म हिन्दु धर्म है। जबकि कुछ समुदाय के लोग ख़ासतौर से दलित, सोशलिस्ट, कम्यूनिस्ट अपने अच्छे विचारों ही को धर्म मानते हैं और यह कहते हैं कि कर्म ही हमारा धर्म है। मगर मुसलमानों के धर्म का पूरी दुनिया में इसलिए सम्मान किया जाता है क्योंकि हमारे पैग़म्बर सल0 से लेकर हज़रत अली अलै0 और इमाम हुसैन अलै0 ख़ासतौर से अहलेबैत अलै0 के मानने वालों को लाउड स्पीकर उतरवाकर कमज़ोर नहीं किया जा सकता। अगर हम लोगों को जलूस व जलसे करने होंगे तो बजाए सड़कों के परमीशन लेकर बड़ी बड़ी पार्कें जहाँ झूठे नेता लोग रेलियाँ करके भोली भाली जनता के वोट हालिस करते हैं, ऐसी ही पार्कों में मुसलमान अपने धार्मिक प्रोग्राम कर सकता है। क्योंकि उसके पास भीड़ की कमी नहीं है। एक आवाज़ पर मजमा इकट्ठा हो जाता है जिसे आरएसएस के लोग कमज़ोर करने में नाकाम साबित हो चुके हैं। जो उनको हज़म नहीं हो रही है। इसीलिए कभी तीन तलाक़, कभी मदरसों में छुट्टियाँ कम किए जाने की बात, कभी भगवा रंग में मुस्लिम दफ़्तरों को रंगने की बात करते हैं। मुहम्मद आफ़ाक़ ने कहा कि भारत की जनता जान चुकी है कि इनके पास न नौकरी है, जिससे बेरोज़गारी दूर हो सके। धन, धरती, शिक्षा, सम्मान हर भारतवासी को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास में यह फ़ेल हो चुके हैं। नोटबन्दी, जी एस टी से पूरे भारत में अफ़रा तफ़री का माहौल है। यह अपने आपसे जनता का ध्यान हटाने के लिए बेवक़ूफ़ी वाली हरकत कर रहे हैं। आने वाले चुनाव में जनता इनको सबक़ सिखाएगी और इन्हें बाहर का रास्ता दिखाएगी। मुहम्मद आफ़ाक़ ने अन्त में यह भी कहा कि अपने आपको राष्ट्रवादी और देश भक्त कहने और कहलवाने वालों की केन्द्र और प्रदेशों में सरकारें हैं यह इस वक़्त राष्ट्रवादी होने का सबसे बड़ा सुबूत दे सकते हैं। भारत में 2 ही छुट्टी होनी चाहिये। 26/जनवरी और 15 अगस्त। मुसलमानों की छुट्टियाँ कम करने से, धार्मिक जगहों को निशाना बनाने से विकास नहीं हो सकता। सच्चे देश भक्त हैं तो 26/जनवरी और 15/अगस्त की छुट्टियों को ही मन्यता दें और बाक़ी छुट्टियों को रद्द कर दें।
 

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