हिमाचल HC के मुख्य न्यायाधीश होंगे जस्टिस सूर्यकांत

हिमाचल HC के मुख्य न्यायाधीश होंगे जस्टिस सूर्यकांत

शिमला: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जज सूर्यकांत हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश होंगे। सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने उनके नाम की सिफारिश की है। अप्रैल 2017 में हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर की रिटायरमेंट के बाद से यह पद खाली चल रहा था। जस्टिस सूर्यकांत का संवैधानिक, सेवा और सिविल मामलों में विशेषज्ञता हासिल है। वह 2000 में हरियाणा के सबसे युवा एडवोकेट जनरल के तौर नियुक्त हुए। वह लगातार दो बार राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य रहे। 10 फरवरी 1962 को जन्में सूर्यकांत हिसार के राजकीय महाविद्यालय से 1977 में स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी।
वहीं, 1984 में कानून की पढ़ाई महर्षि दयानंद विश्वतवद्यालय रोहतक से पूरी की। इसके बाद उन्होंने पहले जिला न्यायालय और फिर 1985 में चंडीगढ़ स्थित पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में बतौर वकील प्रैक्टिस करनी शुरू कर दी।
वहीं, कोलेजियम ने जस्टिस अशोक कुमार सिंह प्रथम की नियुक्ति इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थायी जज के तौर पर की है। मौजूदा समय में वह एडिशनल जज के तौर पर काम कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाले कोलेजियम ने कलकत्ता हाईकोर्ट के जज अनिरुद्ध बोस को दिल्ली हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की है। जबकि आई भट्टाचार्य कलकत्ता हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश होंगे।  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीबी राधाकृष्णन का तबादला आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में जबकि गुजरात हाईकोर्ट की जज अभिलाषा कुमारी को मणिपुर का मुख्य न्यायाधीश बनाने का निर्णय लिया गया है। इंदु मल्होत्रा को वर्ष 2007 में वरिष्ठ वकील का दर्जा मिला था। वह बिना हाईकोर्ट की जज बने सीधे सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त होने वाली पहली महिला वकील होंगी। आजादी के बाद सर्वोच्च अदालत में वह सातवीं महिला जज होंगी। मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस आर भानुमति इकलौती महिला जज हैं। जस्टिस एम फातिमा बीवी 1989 में सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने वाली पहली महिला जज थीं। इसके बाद जस्टिस सुजाता वी मनोहर, जस्टिस रूमा पाल, जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा और जस्टिस रंजना प्रकाश  देसाई जज रह चुकी हैं। इंदु को आर्बिट्रेशन का विशेषज्ञ माना जाता है। गत वर्ष इंस्टीट्यूशनल आर्बिट्रेशन को लेकर केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई उच्च स्तरीय कमेटी में भी थीं। इस कमेटी ने कानून मंत्रालय को अपनी सिफारिशें भेजी थीं।
वर्ष 2016 में उत्तराखंड के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस केएम जोसेफ ने राज्य में लगे राष्ट्रपति शासन को दरकिनार कर दिया था। इसके बाद हरीश रावत सरकार दोबारा सत्ता में आई थी। इस आदेश के एक महीने बाद ही सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने जस्टिस जोसेफ को आंध्र प्रदेश व तेलंगाना के संयुक्त हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने की सिफारिश की थी लेकिन सरकार से इसे हरी झंडी नहीं मिली।
वर्ष 2004 में जोसेफ केरल हाईकोर्ट में स्थायी जज नियुक्त हुए थे। बाद में उनका तबादला उत्तराखंड हाईकोर्ट हो गया था। वर्ष 2014 में वह यहां मुख्य न्यायाधीश बने थे। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में 25 जज हैं जबकि छह जज के पद रिक्त हैं।
 

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